हाथरस कांड : उत्तर प्रदेश सरकार को बदनाम करने में विदेशी ताकत और विदेशी धन का हुआ उपयोग

लखनऊ ( ऊँ टाइम्स. omtimes )  उत्तर प्रदेश में हाथरस के बूलगढ़ी गांव में 14 सितंबर को दलित युवती की बर्बर पिटाई के बाद 29 सितंबर को मौत होने के मामले में यूपी सरकार को बदनाम करने में विदेशी साजिशकर्ता तथा विदेशी मुद्रा का भी जमकर प्रयोग किया गया है। सोशल मीडिया पर फोटो शॉप के प्रयोग से सरकार विरोधी गतिविधियां बढ़ने के बाद सीएम योगी आदित्यनाथ ने शिकंजा कसा और लखनऊ में केस दर्ज कराया गया है। इसके बाद से साजिश करने वाली सभी वेबसाइट बंद हो गई हैं और साजिशकर्ता सरकार के प्रहार से बचने के प्रयास में हैं। 
हाथरस कांड के बाद उत्तर प्रदेश में सीएए की तर्ज पर दंगों के साथ जातीय हिंसा को भड़काने की बड़ी साजिश रची गई। मकसद उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार को बदनाम करना था। इस साजिश में विदेशियों के साथ में हमारे देश के लोग भी खेले। इस बड़ी साजिश का योगी आदित्यनाथ सरकार ने राजफाश कर दिया है। इस मामले में एक वेबसाइट justiceforhathrasvictim.carrd.co की भूमिका सामने आई है। जिसको विदेशों से फंड मिल रहा था। इसके माध्यम से लोगों को हाथरस कांड के अभियान से अधिक संख्या में जोड़ने का प्रयास चल रहा था। नकली आईडी का प्रयोग करके देश के लोगों को गलत फोटो के साथ हिंसा भड़काने वाली सामग्री भेजी जा रही था। इसमें दिल्ली, कोलकाता व अहमदाबाद से नकली आईडी का उपयोग कर कुछ ही घंटों में हजारों लोगों को जोड़ा गया। 

प्रदेश सरकार की ओर से दावा किया गया है कि हाथरस की घटना के बाद राज्य में अचानक कई ऐसी वेबसाइट बनकर तैयार हो गईं। जिनका मकसद जातीय तौर पर लोगों को भड़काना है। इन्हीं में से एक जस्टिस फॉर हाथरस नाम से वेबसाइट है, जो सरकार के सबसे पहले निशाने पर आई है। जब सरकार को इस बारे में भनक लगी, तो कई वेबसाइट खुद ही रात-ओ-रात बंद हो गईं। सुरक्षा एजेंसियों के पास इन सभी वेबसाइट के कंटेंट उपलब्ध हैं। इस बड़ी साजिश की जानकारी उत्तर प्रदेश सरकार को होते ही वेबसाइट ने अपना संचालन बंद कर दिया है। अभी ये वेबसाइट डिलीट हो गई है, लेकिन इसका जो लैंडिंग पेज था उससे मालूम हुआ कि वो फ्री में वेबसाइट बनाने के काम आता है। नाम के प्लेटफॉर्म से दुनियाभर के कई प्रोटेस्ट के लिए वेबसाइट बनाती जाई रही हैं, फिर चाहे अमेरिका में चल रहा ब्लैक लाइव मैटर से जुड़ा कोई प्रोटेस्ट हो या फिर इससे जुड़े कुछ और कांड। 

इसके बाद से सुरक्षा एजेंसियां का शिकंजा कस गया है। पता चला है कि इसको इस्लामी देशों से भारी धन मिल रहा था और उनके संबंध पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया और सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ भारत से हैं। यह लोग नागरिकता विरोधी बिल (सीएए) के विरोध में देश में दंगे फैलाने की साजिश में शामिल थे। 

वेबसाइट में बताया गया है कि प्रदर्शन के वक्त क्या पहनें, कब किधर भागें। सोशल मीडिया पर कोई रिकॉर्डिंग ना डालें। अगर पुलिस लाठीचार्ज करती है तो क्या हो, प्रदर्शन वाली जगह माहौल भड़के तो कैसे निपटें। इसके साथ ही वेबसाइट पर जानकारी दी गई कि मास्क पहनकर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ प्रदर्शन करें, ताकि पहचान ना हो।

उत्तर प्रदेश सरकार का दावा है कि इस तरह की वेबसाइट का मुख्य लक्ष्य सीएम योगी आदित्यनाथ, पीएम नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश व केंद्र सरकार की छवि को खराब करना है। वेबसाइट पर फर्जी आईडी से कई लोगों को जोड़ा गया। इसके साथ ही इसमें दंगे कैसे करें और फिर दंगों के बाद कैसे बचें, इसके कानूनी उपाय की जानकारी वेबसाइट पर दी गई है। 
हाथरस के चंदपा थाने में दंगों की साजिश करके प्रदेश में जातीय और सांप्रदायिक हिंसा भड़काने, अराजकता फैलाने, दंगों के बहाने योगी सरकार को बदनाम करने, अफवाहें फैलाने, पीड़ित के परिवार को गुमराह कर सरकार के खिलाफ भड़काने, फर्जी तस्वीरों, फर्जी सूचनाओं, फोटोशाप्ड तस्वीरों की मदद से नफरत फैलाने के आरोपों में एफआईआर दर्ज हुई है।
इसके अलावा सोशल मीडिया पर झूठे, आपत्तिजनक, संवेदनहीन और बेहद भड़काऊ पोस्ट डाल कर लोगों में जातीय नफरत पैदा करने, गलत व अप्रमाणिक सूचनाएं सार्वजनिक कर यूपी को दंगों की आग में झोंकने के प्रयास का भी मामला दर्ज हुआ है। पुलिस के मुताबिक उपरोक्त साजिश के जरिए यूपी की कानून- व्यवस्था को बिगाड़ने की कोशिश की गई।
हाथरस में मृत दलित युवती के मामले में राजनीति लगातार जोर पकड़ रही है। हाथरस में राजनीतिक जमावड़े के बीच उत्तर प्रदेश की सरकार की ओर से बड़ा दावा किया गया है। यूपी सरकार का दावा है कि नागरिकता संशोधन एक्ट के विरोध में जिस प्रकार प्रदेश में जगह-जगह हिंसा की तरह ही प्रदेश में माहौल बिगाड़ने का प्रयास किया गया है। इसके लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म, सोशल मीडिया आदि का सहारा लिया जा रहा है। हाथरस की घटना के बाद लगातार इस पर राजनीतिक बयानबाजी हो रही है। हाथरस में भी कई राजनेताओं और पाॢटयों का जाना हुआ है। जहां पर हजारों की संख्या में समर्थक इकट्ठा हुए हैं।

लेखक: OM TIMES News Paper India

omtimes news paper (Regd. & App. by- Govt. of India ) प्रकाशक एवं प्रधान सम्पादक रामदेव द्विवेदी 📲 9453706435 , 6307662484 🇮🇳 ऊँ टाइम्स

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